गुरु-शिष्य परंपरा
धाम का गुरुकुल प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा पर चलता है। ऋषिकुमार गुरुदेव के सान्निध्य में रहकर वेदमंत्र, संध्यावंदन, यज्ञविधि, संस्कृत और शास्त्रों का अध्ययन करते हैं।
दिनचर्या
ब्राह्ममुहूर्त में जागरण, स्नान और प्रातः संध्या; तत्पश्चात नित्य यज्ञ और वेदपाठ। दोपहर में अध्ययन और सेवा; संध्या को संध्यावंदन, भजन-कीर्तन और श्री यंत्रराज की आरती। उत्तरायण, गणेशोत्सव और गुरुपूर्णिमा जैसे पर्व शास्त्रीय पद्धति से मनाए जाते हैं।
षोडश संस्कार
गर्भाधान से अंत्येष्टि तक के सोलह वैदिक संस्कार धाम में शास्त्रोक्त विधि से कराए जाते हैं। वार्षिकोत्सव के अवसर पर बच्चों का सामूहिक जनेऊ (उपनयन) और माता-पिता विहीन बेटियों के सामूहिक वैदिक विवाह होते हैं – २२ अप्रैल २०२६ के द्वितीय वार्षिकोत्सव में ११ बच्चों का जनेऊ और ५ बेटियों के विवाह सम्पन्न हुए।
प्रवेश और संपर्क
गुरुकुल में प्रवेश, संस्कार-विधि या यज्ञ के लिए धाम से सीधे संपर्क करें – संपर्क पृष्ठ पर आधिकारिक विवरण है।
